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 ईश्वर एक है

*🌷 ईश्वर एक है, परन्तु उस प्रभु के अनेक नाम है।*

*🌷क्योंकि वह अनन्त गुण- कर्म स्वभाव वाला है। ईश्वर का एक नाम विष्णु भी है, यज्ञ को भी विष्णु कहा गया है। ईश्वर यज्ञस्वरूप है, अत: आप अपने घर को यज्ञमय बना दिजिये, तब यज्ञ की शक्ति अर्थात् लक्ष्मी स्वतः वहाँ निवास करेगी । जिस घर में प्रतिदिन यज्ञकर्म होता है- अग्निहोत्र होता है, उस घर में सुख- सम्पत्ति - समृद्धि और शान्ति का वास होता है। जहाँ प्रभु बसते है उस घर में किस चीज़ की कमी? परोपकार के सभी कर्म ' यज्ञ ' कहलाते है , तभी तो यज्ञ को सर्वश्रेष्ठ कर्म कहा गया है।वेद का भी यही आदेश है कि जो स्वर्ग की कामना करते है उन्हें यज्ञ करना चाहिए।*

 

*🌷यज्ञकर्ता ही स्वर्ग के अधिकारी है । स्वर्ग क्या है ? - सुख विशेष को स्वर्ग कहते है, दु:ख विशेष को नर्क कहते है।स्वर्ग या नर्क इसी संसार में मिलता है। स्वर्ग- नर्क कोई स्थान विशेष नही है जैसे साधारण लोग कामना करते है।*

*🌷जो लोग चाहते है, उनके पास हमेशा धन- दौलत के भण्डार भरपूर रहे - कभी धन का अभाव न हो, उन सब को चाहिए कि वे अपने घर में प्रतिदिन यज्ञ-अग्निहोत्र अवश्य किया करे।*

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*🌷ओ३म् स्वयं वाजिँस्तन्वं कल्पयस्य स्वयं यजस्य स्वयं जुषस्थ। महिमा तेऽन्येन न सन्नशे।। ( यजुर्वेद )*

 

*💐 अर्थ:- हे मनुष्य ! तु आप अपने शरीर को समर्थ कर, स्वयं यज्ञ कर और उसके फल को पा क्योंकि यज्ञ का महत्व स्वयं यज्ञ करने में है।*

*🕉🙏 ज्ञान रहित भक्ति अंधविश्वास है।*

*🕉🙏 भक्ति रहित ज्ञान नास्तिकता है ।*

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